Monday, June 14, 2021
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जाट परिवार में जन्मे लडक़े ने कालेज में दाखिले के लिए नाम के आगे लगाया वर्मा, बना दिल्ली का सीएम

भारत की राजधानी दिल्ली मेेंं कई मुख्यमंत्री आए और गए। सभी ने अपने कार्यकाल में दिल्ली का विकास करवाने का दावा किया। लेकिन कुछ बिल्कुल अलग थे। जिसमें साहिब सिंह वर्मा भी शामिल थे।

मुंडका (mundka ) के जाट परिवार ( jat family )  में जन्मे लडक़े ने प्रोफेसर की सलाह पर अपने नाम के आगे वर्मा लगा लिया। क्योंकि जाटो को लेकर दिल्ली के कालेजों में पूर्वाग्रह था। दाखिला आसानी से नहीं मिलता था। साहिब सिंह वर्मा (sahib singh verma) की शख्सियत चट्टटान जैसी थी। वह जो एक बार बोले देते थे वह पूरा करके ही दम लेते थे।

sahib singh verma
साहिब सिंह वर्मा

छोटी उम्र में ही आरएसएस में हो गए थे सक्रिय
साहिब सिंह वर्मा दिल्ली वालों के दिलों पर राज करते थे। छोटी उम्र में वह आरएसएस (rss )में सक्रिय हो गए थे। साल 1977 में उन्होंने पहला चुना लड़ा। वह पार्षद (counsellor) चुने गए। इसके बाद उन्होंने पीछे मुडक़र नहीं देखा। 1993 में वह विधानसभा चुनाव जीतकर वह शिक्षा और विकास मंत्री (DEVLOPMENT MANISTER ) बने। पार्टी ने तीन साल बाद साल 1996 में दिल्ली के मुख्यमंत्री के पद की जिम्मेदारी दी गई।

सत्ता जाने के बाद केंद्र में भी रही महत्वपूर्ण भूमिका

दिल्ली में सत्ता जाने के बाद केंद्र ने उनको अपने पास बुला लिया। साल 1999 का लोकसभा चुनाव में उन्होंने बाहरी दिल्ली सीट से दो लाख से अधिक वोटो से अंतर जीता। वे एनडीए सरकार में मंत्री भी रहे। नौकरशाही पर लगाए हुए कर्मचारी भविष्य निधि पर ब्याज दरों को कम करने से रोका। उस

राजस्थान के सडक़ हादसे में हो गई थी मौत

साहिब सिंह वर्मा का जन्म बाहरी दिल्ली के मुंडका गांव के किसान परिवार में हुआ। साहिब सिंह वर्मा की साल 2007 में राजस्थान में सडक़ हादसे (road accident) में असामयिक मृत्यु हो गई। उस समय वह सीकर जिला के नीमकाथाना के एक स्कूल का भूमिपूजन करके टाटा सफारी से वापस लौट रहे थे।

 

 

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