Friday, June 11, 2021
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गरीबी के कारण राशन की दुकान में किया काम, मेहनत से हासिल किया मुकाम, बने IAS

आपकी प्रतिभा के सामने कोई भी कोई परेशानी नहीं टिक सकती। लगातार मेहनत करने से आपको मंजिल मिल ही जाती है।

सिविल सर्विस (CIVIL SERVICE) परीक्षा की तैयारी करने वाले कैंडिडेट को काफी संघर्ष करना पड़ता है। ऐसा ही संघर्ष हरीश चंद्र को करना पड़ा। हरीश चंद्र (harish chander  )दिल्ली अट्रोल लेन बस्तियों में रहने वाले हरीश को बचपन (childhood) में काफी संघर्ष करना पड़ा। कभी वह पानी भरने के लिए कड़ी धूप में लाइन में खड़े होते। तो कभी दुकान पर काम करते। लेकिन हरीश ने अपने फोकस को नहीं छोड़ा।

पिता थे दिहाड़ी मजदूर

हरीश के पिता एक दिहाड़ी मजदूर थे। वह रिक्शा चलाकर अपने घर का गुजारा करते थे। उनकी मां दूसरे के घरों में जाकर काम करती थी। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि हरीश किस स्थिति में अपना जीवन व्यतीत कर रहे होंगे। मां दूसरों के घर में काम करके जो पैसे कमाती थी वह हरीश को पढ़ानें में खर्च कर देती। हरीश घर का खर्च निकालने के लिए दूसरों के घरों में भी काम करने लगे। ताकि परिवार को सहारा दे सके।

गोबिंद जयसवाल से भी प्रभावित हुए हरीश

हरीश गोबिंद जयसवाल (govind jaiswal)से भी अधिक प्रभावित हुए। साल 2007 में गोबिंद आईएएस बने थे। गोबिंद के पिता रिक्शा चलाते थे। हरीश को लगा कि जब गोबिंद आईएएस बन सकते है तो वह क्यो सिविल सर्विस परीक्षा पास नहीं कर सकते। हिंदू कालेज (hindu collage )से बीए करने के बाद उन्होंने दोस्तों सें आईएएस के बारे में जानकारी मिली थी।

पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए  ट्यूशन भी पढ़ाते थे हरीश

हरीश अपने पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए ट्यूशन भी पढ़ाया करते थे। हरीश ने बताया कि परीक्षा के दौरान राजनीतिक विज्ञान और दर्शन शास्त्र उनके विषय थे। विषय चयन के दौरान पंतजलि के शिक्षक धर्मेंद्र सर ने मेरा मार्गदर्शन कि या। उनका दर्शनशास्त्र समझाने का ऐसा तरीका था कि समझाने पर ही सब क्लियर हो जाता था। हरीश ने पहले ही प्रयास में आईएएस क्लियर कर लिया। उनकी 309वी रंैंक थी।

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